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भारत सरकार ने मजार-ए-शरीफ से अपने राजनयिकों को वापस बुलाया, जबकि एडवायजरी जारी- भारतीय नागरिक जल्दी निकलें, जानिये पूरी रिपोर्ट

 

भारत सरकार ने मजार-ए-शरीफ से अपने राजनयिकों को वापस बुलाया, जबकि एडवायजरी जारी- भारतीय नागरिक जल्दी निकलें, जानिये पूरी रिपोर्ट-



आपको बताते चले की तालिबान के बढ़ती ताकत से अफगानिस्तान में हालात बदतर होते जा रहे हैं और फिर यहां के चौथे सबसे बड़े शहर मजार ए शरीफ के ज्यादातर हिस्सों पर तालिबान के कब्जे के बाद भारत सरकार ने अपने नागरिकों से शहर छोड़ने को कह दिया है।

इसके साथ ही मजार ए शरीफ में मौजूद भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया पर कहा कि मंगलवार शाम को मजार ए शरीफ से एक स्पेशल फ्लाइट दिल्ली के लिए उड़ान भरने ही वाली है।


 अब जो भी भारतीय नागरिक शहर में है वे भारत लौटने के लिए इस फ्लाइट में सवार हो सकते हैं और इसके लिए उन्हें वॉट्सऐप पर अपने पासपोर्ट की डीटेल भेजनी ही होगी।


काबुल भी सुरक्षित नहीं जानिए कैसे, तालिबान के हमले रहे जारी
आपको बताते चले की अफगानिस्तान की राजधानी काबुल देश के दूसरे हिस्सों के मुकाबले सुरक्षित है लेकिन अब से पिछले बुधवार को काबुल में तालिबान के आत्मघाती लड़ाकों ने एक बेहद दुस्साहसिक हमले में रक्षा मंत्री के घर को निशाना भी बनाया था।


अब इस हमले में 8 नागरिक मारे गए है और दर्जनों घायल हुए है, यह बीते एक साल में काबुल पर तालिबान का सबसे बड़ा हमला रहा था।

इस हमले के बाद से तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने भास्कर को भेजे एक लिखित बयान में कहा है कि, 'इस्लामी अमीरात की शहीद बटालियन का ये हमला काबुल सरकार के प्रमुख लोगों के खिलाफ तालिबान के हमलों की शुरुआत ही है और फिर हम आगे भी ऐसे हमले करेंगे।' 


अब इसके अगले ही दिन यानी शुक्रवार को तालिबान ने अफगानिस्तान सरकार के मीडिया प्रमुख दावा खान मेनापाल की काबुल में हत्या भी कर दी गयी थी।


कंधार से 11 जुलाई को बुलाए थे डिप्लोमेट्स जानिये आखिर कैसे-
बता दे की भारत सरकार मजार ए शरीफ के दूतावास में काम करने वाले ज्यादातर कर्मचारियों को भी वापस बुला रही है और फिर शाम को आने वाली इसी फ्लाइट से उन्हें लाया भी जाएगा जबकि एक महीने में ऐसा दूसरी बार हो रहा है जब अफगानी दूतावास से भारतीय डिप्लोमेट्स को बुलाना भी पड़ा है।


इसके साथ ही आपको बताते चले कि, इससे पहले 11 जुलाई को कंधार दूतावास से डिप्लोमेट्स को भी बुला लिया गया था जबकि सरकार ने उस समय कहा था कि दूतावास बंद भी नहीं किया जा रहा है, लेकिन स्टाफ को लिमिटेड ही कर दिया गया है।

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