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कोवीशील्ड के डोज का गैप बढ़ाने का मामला आया सामने, एस्ट्राजेनेका ने भारत के फैसले का समर्थन करते हुए कहा- वैक्सीन का दूसरा डोज दूसरे या तीसरे महीने लगे तो ज्यादा सुरक्षा देगा, जाने हिंदी में पूरी रिपोर्ट

 

कोविशील्ड के डोज का गैप बढ़ाने का मामला आया सामने, एस्ट्राजेनेका ने भारत के फैसले का समर्थन करते हुए कहा- वैक्सीन का दूसरा डोज दूसरे या तीसरे महीने लगे तो ज्यादा सुरक्षा देगा, जाने हिंदी में पूरी रिपोर्ट 


आप महज 3 पॉइंट में  ही समझें भारत का फैसला सही क्यों 

  1. (1) पोलार्ड ने शुक्रवार को एक इंटरव्यू में ब्रिटेन में एस्ट्राजेनेका की दो डोज के बीच का अंतर कम करने और भारत में इसे बढ़ाने का जिक्र भी किया और साथ ही में उन्होंने कहा कि ब्रिटेन ने ऐसे समय में दो डोज के गैप को कम किया गया है जबकी उसकी आबादी के एक बड़े हिस्से का वैक्सीनेशन हो भी चुका था।
  2. (2) अब ऐसे में दोनों देशों की वैक्सीनेशन पॉलिसी की तुलना नहीं की जानी चाहिए क्योंकि दोनों देशों में अलग-अलग परिस्थितियों के कारण अलग-अलग फैसले लिए गए है।
  3. (3) भारत में मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए साफ समझ में आ रहा है कि वह जल्द से जल्द अधिक संख्या में लोगों को वैक्सीन की कम से कम एक डोज देने के बारे में सोच रहा है जो कि एक सही फैसला है शाबित हो रहा है। 

 दोस्तों जैसा की आप सभी जानते हो की देश में कोरोना वैक्सीन कोवीशील्ड के दो डोज के बीच गैप बढ़ाने के सरकार के फैसला का ब्रिटिश फार्मा कंपनी एस्ट्राजेनेका ने भी समर्थन किया है। एस्ट्राजेनका-ऑक्सफोर्ड ने ही इस वैक्सीन का फॉर्मूला तैयार किया है और जबकि सीरम इंस्टीट्यूट इसे भारत में कोवीशील्ड नाम से बना रहा है। 
और इसके साथ ही एस्ट्राजेनका के क्लिनिकल ट्रायल के मुख्य जांचकर्ता प्रो. एंड्रयू पोलार्ड ने शुक्रवार को कहा है कि वैक्सीन सिंगल डोज के बाद दूसरे और तीसरे महीने में ज्यादा सुरक्षा प्रदान करती है।  यानी की  इसका सुरक्षा का स्तर और भी बढ़ जाता है। 

अब एस्ट्राजेनेका सिंगल डोज वैक्सीन पर काम नहीं कर रही है 
आपकी जानकारी के लिए बताते चले की ब्रिटेन में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के पीडियाट्रीशियन और संक्रमण से होने वाली बीमारियों के विभाग के प्रोफेसर पोलार्ड ने कहा कि एस्ट्राजेनेका सिंगल डोज वैक्सीन पर काम नहीं कर रहा है और हमारा ग्रुप बूस्टर डोज पर भी काम नहीं कर रहा। उन्होंने कहा कि वैक्सीन की किल्लत की स्थिति में कम संख्या में लोगों की बेहतर सुरक्षा की बजाय अधिक से अधिक लोगों के लिए सुरक्षा के उपाय सुनिश्चित करने का प्रयास भी किया जाना चाहिए जिससे की जल्द से जल्द लोगो की मदद हो सके। 

कोवीशील्ड के डोज का गैप बढ़ाने के लिए डॉ. अरोड़ा के तर्क भी जाने 

  • आपको बताते चले की भारत में जब वैक्सीन डोज के बीच गैप तय करना था तो तब हमें इस आंकड़े की जानकारी नहीं थी और हमने अपने परीक्षण डेटा के आधार पर 4 सप्ताह का गैप तय किया जिससे अच्छे रिजल्ट मिले और बाद में ज्यादा वैज्ञानिक और प्रयोगशाला संबंधी आंकड़ों के आधार पर इसमें बदलाव किए गए।
  • और इसके साथ ही ब्रिटेन की पब्लिक हेल्थ इंग्लैंड (PHE) ने अप्रैल के अंतिम हफ्ते में आंकड़े जारी कर बताया था कि वैक्सीन के दोनों डोज के बीच 12 हफ्ते का गैप होने पर असर 65% से 88% के बीच रहा करता है। फिर इसी वजह से ब्रिटेन अल्फा वैरिएंट के कहर से बाहर आ सका। 
  • हमें भी लगा कि यह एक अच्छा आइडिया है फिर इस बात के बुनियादी वैज्ञानिक कारण भी मौजूद हैं कि गैप बढ़ाने पर एडेनोवेक्टर टीके बेहतर रिजल्ट देते हैं। तो इसलिए और टीके की खुराकों के बीच अंतराल बढ़ाकर 12 से 16 हफ्ते करने का 13 मई को फैसला किया गया है।

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