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ईरान में राष्ट्रपति चुनाव आज, 4 कैंडिडेट दौड़ में पिछली बार हारे 60 साल के कट्टरपंथी इब्राहिम रईसी सबसे आगे; एटमी प्रोग्राम जारी रखने के हिमायती जाने हिंदी में खबर


ईरान में राष्ट्रपति चुनाव आज, 4 कैंडिडेट दौड़ में पिछली बार हारे 60 साल के कट्टरपंथी इब्राहिम रईसी सबसे आगे; एटमी प्रोग्राम जारी रखने के हिमायती जाने हिंदी में खबर  

इस बार कितने उम्मीदवार होंगे ?
आपको बता दे की कुल 4 उम्मीदवार मैदान में हैं, हालांकि गार्जियन काउंसिल ने 7 उम्मीदवारों के नाम शॉटलिस्ट किए थे  जिनमे से 3 उम्मीदवारों ने नाम वापस ले लिए ये भी दिलचस्प है। उदारवादी धड़े से ताल्लुक रखने वाले मोहसिन मेहर अलीजाद ने तो चुनाव के दो दिन पहले यानी 16 जून को नाम वापस लिया और वैसे भी उनके जीतने की उम्मीद न के बराबर थी। एक और प्रत्याशी अलीरजा जकानी ने भी नाम वापस ले लिया है और इनके अलावा सईद जलीली ने भी नाम वापस लिया।


आपकी जानकारी के लिए आपको बताते चले की जकानी भी कट्टरपंथी हैं और माना ये जा रहा है कि उन्होंने नाम इसलिए वापस लिया ताकि इब्राहिम रईसी की जीत की राह में कोई दिक्कत न हो और इसके साथ ही कहा ये भी जा रहा है कि जकानी पर नाम वापस लेने के लिए दबाव डाला गया। इसी तरह जलीली भी कट्टरपंथी ही माने जाते हैं। ईरान और अमेरिका के बीच 2015 में हुई न्यूक्लियर डील का वो हिस्सा रहे हैं रईसी को मजबूत करने के लिए ही ऐन वक्त पर जलीली भी पीछे हट चुके  हैं।


ईरान में आज राष्ट्रपति चुनाव होने जा रहे हैं। कुल चार कैंडिडेट मैदान में हैं। इनमें से 60 साल के धर्मगुरु और चीफ जस्टिस इब्राहिम रईसी का पलड़ा भारी माना जा रहा है जबकि नए राष्ट्रपति का कार्यकाल अगस्त में शुरू होगा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रईसी की जीत लगभग तय हो चुकी है और अगर ऐसा हुआ तो अमेरिका और पश्चिमी देशों से ईरान का टकराव बढ़ेगा क्योंकि रईसी एटमी प्रोग्राम जारी रखने के हिमायती हैं। दूसरी तरफ रईसी जीते तो ईरान-चीन में करीबी बढ़ेगी। हालांकि राष्ट्रपति चुनाव को लेकर ईरान में बहुत ज्यादा उत्साह नहीं है लेकिन इसकी एक वजह कोविड-19 भी है, हाल ही में ईरान ने अपनी ‘कोवईरान’ वैक्सीन बनाने का दावा पेश भी किया है।


चुनाव या औपचारिकता
खबरों के मुताबिक माना जा रहा कि वोटिंग का प्रतिशत कुछ भी रहे, लेकिन इब्राहिम रईसी की जीत तय है। इसकी तीन वजहें प्रमुख हैं। पहली- उन्हें कट्टरपंथी धड़े, गार्जियन काउंसिल और सर्वोच्च धर्मगुरु का समर्थन हासिल है। दूसरी- अमेरिका और पश्चिमी देशों के सामने कभी न झुकने की बात करते हैं जो की उनके स्पोटर्स को मुहबी है।  तीसरी- ईरान की इकोनॉमी के लिए आत्मनिर्भर कार्यक्रम लाने की बात करते हैं। एक वजह यह भी है कि उदारवादी और सुधारवादी उम्मीदवारों के खिलाफ माहौल बना दिया गया। जो कट्टरपंथी रईसी को चुनौती दे रहे थे अब उन्होंने भी नाम वापस ले लिए है रईसी 2017 के चुनाव में हसन रूहानी से हार गए थे। सेना (रिवोल्यूशनरी गार्ड्स) भी इनके साथ ही है।








































































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