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दिल्ली दंगों के आरोप में एक साल जेल में रहीं नताशा-देवांगना बोलीं- एक छोटी सी खिड़की थी, जहां से हम रोज रात चांद देखते थे; बस वही हमारी उम्मीद थी जानी सब कुछ हिंदी में

 

दिल्ली दंगों के आरोप में एक साल जेल में रहीं नताशा-देवांगना बोलीं- एक छोटी सी खिड़की थी, जहां से हम रोज रात चांद देखते थे; बस वही हमारी उम्मीद थी जानी सब कुछ हिंदी में 




जाने क्या कहती है - देवांगना: एक तो जेल जाना और दूसरा कोरोना के समय जेल जाना। 14 दिन तक हम बिल्कुल अकेले एक बैरक में बंद थे। एक किताब भी आपके पास नहीं थी और किसी से बात नहीं कर सकते बल्कि घर पर फोन कर नहीं सकते और हर एक पल भारी था। बस लगता था कोई तो पांच मिनट के लिए बाहर निकाल दे और मुझे खुलकर सांस लेनी है।

 बस, एक छोटी सी खिड़की थी, जहां से हम रोज रात को चांद देखते थे और वही उम्मीद थी हमारी। लेकिन इसके साथ ही जैसा नताशा ने कहा कि जेल में रहते हुए मैं बार-बार सोसायटी के पिंजरों की तुलना वहां से करती थी।


आपको बता दे की पिछले साल दिल्ली में CAA-NRC के विरोध में लंबे समय तक आंदोलन चला। आंदोलन के दौरान ही दिल्ली के कुछ हिस्से दंगे की चपेट में आ गए। दंगाइयों की तलाश में पुलिस स्टूडेंट्स तक पहुंची और कई छात्र गिरफ्तार किए गए। जेएनयू की स्टूडेंट नताशा नरवाल और देवांगना कलिता को भी दंगे के आरोप में आतंकवाद विरोधी कानून (UAPA) के तहत गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था और दोनों ने एक साल से ज्यादा समय तिहाड़ में रहीं लेकिन हाल ही में उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है। 


(1 ) सवाल: आप लोगों को कितनी उम्मीद थी कि इस बार बेल मिल जाएगी?
नताशा:
 जेल में रहने की हमने लंबी तैयारी कर ली थी। हम ऐसे आरोप में जेल में बंद किए गए थे, जिसमें कितने दिन लगेंगे इसका कुछ पता नहीं था लेकिन हमारी या हमारे साथ दूसरे लोगों की गिरफ्तारी का डर दिखाकर यह स्टूडेंट आंदोलन को दबाने का प्रयास था और हमारी बेल में अंतिम दम तक दिल्ली पुलिस ने अड़ंगे लगाए। इसलिए हम तो लंबी तैयारी से गए थे। वह तो दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का नतीजा है कि हम आज बाहर हैं।


(2 ) सवाल: क्या पढ़ाई करते वक्त कभी अंदाजा था कि जेल भी जाना पड़ सकता है?
देवांगना:
 नजीब, रोहित वेमुला या फिर अपने हक के लिए किसी भी लड़ाई में स्टूडेंट्स को डिटेन करना, उनके ऊपर वाटर कैनन चलाना और यह सब तो हो ही रहा था। पुलिस रिप्रेशन तो पहले से ही होता आ रहा है। जेल भी जा सकते हैं और हमें इसका अंदाजा भी था लेकिन हम पहली बार जेल जाएंगे वह भी UAPA के आरोप के तहत यह कभी नहीं सोचा था।

(3 ) सवाल: जेल के भीतर आप लोगों के साथ कोई दुर्व्यवहार तो नहीं हुआ?
नताशा
: शायद हमारा केस इतना चर्चित था कि ऐसा कुछ अनुभव हमें हुआ नहीं। शुरू-शुरू में जरूर जेल का स्टाफ हमसे पूछताछ ज्यादा करता था लेकिन बार-बार यह पूछते थे कि क्या आरोप है तुम पर। फिर बाद में तो लोग हमारे ऊपर लगे आरोपों को उतना ही अविश्वसनीय मानने लगें, जितना हम मानते हैं।

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